
नई दिल्ली: गुजरात की सूरत सेशन्स कोर्ट ने शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाने के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तीन साल पुराने एक मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी युवक को बरी कर दिया है। युवक की दलील थी कि, तीन साल तक सहमति से यौन संबंध बनाने के बाद शादी से इनकार करना बलात्कार नहीं है। कोर्ट ने बचाव पक्ष की इस दलील को समझा और युवक को बरी कर दिया। ऐसे मामले में आए दिन सामने आते हैं, जिनमे रिश्ता खत्म हो जाने पर युवक पर बलात्कार का आरोप लगा दिया जाता है। ऐसे मामलों के लिए यह फैसला बहुत बड़ा है।
मिली जानकारी के अनुसार, सूरत के डींडोली क्षेत्र की एक बीबीए छात्रा ने कतारगाम में एम.टेक की पढ़ाई कर रहे युवक के खिलाफ जुलाई 2022 में शिकायत दर्ज करवाई थी। युवती ने लड़के पर आरोप लगाया था कि, युवक ने इंस्टाग्राम के माध्यम से दोस्ती की, शादी का झांसा देकर उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए और उसके बाद शादी करने से इनकार कर दिया। इस शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और अदालत में चार्जशीट दायर की।
वहीं इस मामले की सुनवाई के दौरान युवक के वकील ने अदालत में दलील दी कि, युवक और युवती के बीच संबंध आपसी सहमति से बने थे और किसी भी प्रकार की कोई जोर जबरदस्ती नहीं की गई थी। वकील ने आगे कहा कि, यह मामला प्रेम संबंध टूटने के कारण दर्ज कराया गया है। इसके बाद बचाव पक्ष के वकील ने हाईकोर्ट के एक पूर्व फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अगर शारीरिक संबंध शादी के वादे पर बने हों, तो वह स्वतः बलात्कार नहीं माना जा सकता। अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए युवक को बरी कर दिया।
इतना ही नहीं कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि, शिकायतकर्ता युवती शिक्षित है, जो अपने निर्णय खुद ले सकती है। युवक और युवती की जातियां अलग थीं और युवक व उसकी मां ने इस कारण शादी से इंकार कर दिया। इसके बावजूद युवती ने युवक के साथ संबंध बनाए रखे। युवती ने होटल और रेस्टोरेंट में पहचान पत्र स्वेच्छा से दिए थे, जिससे स्पष्ट होता है कि कोई दबाव नहीं था।