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रायपुर प्रेस क्लब में सत्ता का नया अध्याय: कड़े मुकाबले के बाद मोहन तिवारी बने अध्यक्ष, संगठन की रणनीतिक कमान गौरव शर्मा के हाथ…

रायपुर: रायपुर प्रेस क्लब के चुनाव ने इस बार सिर्फ पदाधिकारियों का चयन नहीं किया, बल्कि संगठन के भीतर सत्ता संतुलन, नेतृत्व क्षमता और भविष्य की दिशा भी तय कर दी. सुबह से शाम तक चले मतदान और देर रात तक चली मतगणना के बाद आखिरकार तस्वीर साफ हो गई. मोहन तिवारी ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर प्रेस क्लब की कमान संभाल ली है, जबकि गौरव शर्मा को महासचिव की जिम्मेदारी मिली है.

यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक रहा
5 पदों के लिए 37 उम्मीदवार मैदान में थे, और लगभग हर पद पर मुकाबला बेहद करीबी और कांटे का रहा। पूरे दिन प्रेस क्लब परिसर राजनीतिक अखाड़े में तब्दील नजर आया, जहां हर गुट अपनी जीत को लेकर आश्वस्त दिखा.

मतदान से मतगणना तक: हर राउंड में बदलती रही तस्वीर
सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक चले मतदान में वरिष्ठ पत्रकारों से लेकर युवा मीडियाकर्मियों तक भारी उत्साह के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग किया. मतदान के बाद जैसे ही मतगणना शुरू हुई, परिसर में उत्सुकता, तनाव और रणनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया. हर राउंड के साथ समीकरण बदलते रहे, लेकिन जैसे-जैसे काउंटिंग आगे बढ़ी, मोहन तिवारी की बढ़त निर्णायक होती चली गई। देर रात परिणामों पर अंतिम मुहर लगी.

निर्वाचन अधिकारी ने की औपचारिक घोषणा
मतगणना पूरी होने के बाद अपर कलेक्टर एवं निर्वाचन अधिकारी नवीन कुमार ठाकुर ने विजयी उम्मीदवारों की औपचारिक घोषणा की. उसके बाद सभी को जीत का प्रमाण पत्र सौंपा. इस दौरान प्रेस क्लब परिसर तालियों और नारों से गूंज उठा.

रायपुर प्रेस क्लब के नए कर्णधार
अध्यक्ष: मोहन तिवारीमहासचिव: गौरव शर्माउपाध्यक्ष: दिलीप साहूकोषाध्यक्ष: दिनेश यदुसंयुक्त सचिव: निवेदिता साहू और भूपेश जांगड़े
जीत के साथ जश्न, संगठन में नई उम्मीद
परिणाम आते ही समर्थकों में जबर्दस्त उत्साह देखने को मिला. एक-दूसरे को मिठाई खिलाई गई, बधाइयों का दौर चला और प्रेस क्लब परिसर देर रात तक उत्सव स्थल बना रहा।नई टीम ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में पत्रकारों के अधिकार, सुरक्षा, सुविधाएं और संगठन की गरिमा को लेकर ठोस और आक्रामक पहल की जाएगी.

चुनाव सिर्फ पदों का नहीं, शक्ति संतुलन का था
इस बार का चुनाव सामान्य प्रक्रिया नहीं था, बल्कि इसे संगठन के भीतर शक्ति परीक्षण के तौर पर देखा जा रहा था. अलग-अलग गुटों की सक्रियता, रणनीतिक बैठकों और आखिरी समय तक चली माइक्रो मैनेजमेंट राजनीति ने इसे बेहद दिलचस्प बना दिया. 37 उम्मीदवारों का मैदान में उतरना इस बात का प्रमाण है कि रायपुर प्रेस क्लब की राजनीति पूरी तरह जीवंत, सक्रिय और प्रभावशाली है.

किसने कहां लड़ा चुनाव: पूरी सूची.

अध्यक्ष पद

1. अनिल पुसद्कर

2. कृष्ण कुमार शर्मा

3. प्रफुल्ल ठाकुर

4. प्रशांत दुबे

5. मोहन तिवारी

6. सुनील नामदेव

उपाध्यक्ष पद

1. अजय सक्सेना

2. दिलीप कुमार साहू

3. भोलाराम सिन्हा

4. रमन हलवाई

5. राजेश सोनकर

6. विकास कुमार यादव

7. शरनजीत सिंह तेतरी

8. सुधीर तंबोली

कोषाध्यक्ष पद

1. कुलदीप शुक्ला

2. दिनेश कुमार यदु

3. नदीम मेमन

4. नागेंद्र वर्मा

5. बम्लेश्वर (अरविंद) सोनवानी

6. राहुल चौबे

महासचिव पद

1. गौरव शर्मा

2. दानिश अनवर

3. पराग मिश्रा

4. पीयूष मिश्रा

5. महादेव तिवारी

6. संतु राम फरिकार

7. सुरेंद्र शुक्ला

8. संदीप शुक्ला

संयुक्त सचिव पद

1. उमेश यदु

2. निवेदिता साहू

3. प्रदीप चंद्रवंशी

4. भूपेश जांगड़े

5. लखन शर्मा

6. विनीता मंडल

7. शिव शंकर सारथी

8. संतोष साहू

9. हेमराज डोंगरे

मोहन तिवारी फैक्टर: क्यों मानी जा रही है ये जीत अहम?
मोहन तिवारी की जीत को अनुभव, संगठनात्मक पकड़ और जमीनी संपर्कों की जीत (The victory of grassroots connections)के रूप में देखा जा रहा है. उन्होंने पूरे चुनाव में संतुलित, आक्रामक लेकिन सकारात्मक रणनीति के साथ अभियान चलाया.

गौरव शर्मा की भूमिका: संगठन का ऑपरेशन हेड
महासचिव बने गौरव शर्मा को संगठन का रणनीतिक इंजन माना जा रहा है। चुनाव प्रबंधन से लेकर मैनेजमेंट तक उनकी भूमिका पहले से ही चर्चा में रही है.

नई कार्यकारिणी के सामने ये बड़ी चुनौतियां

पत्रकारों को जमीन या मकान दिलाना

पत्रकार सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा

प्रेस क्लब इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास

स्वास्थ्य, बीमा और कल्याण योजनाएं

प्रशासन और सरकार से मजबूत संवाद

युवा पत्रकारों को मुख्यधारा में लाना

राजनीतिक संकेत: संगठन में नए ध्रुवीकरण की शुरुआत?
इस चुनाव के नतीजों को सिर्फ संगठनात्मक नहीं, बल्कि वैचारिक बदलाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में इसकी झलक फैसलों और नीतियों में दिख सकती है. रायपुर प्रेस क्लब को नई टीम मिल चुकी है. अब देखना दिलचस्प होगा कि मोहन तिवारी और उनकी टीम संगठन को सिर्फ चलाती है या इतिहास रचती है

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