
रायपुर: नियमितीकरण सहित अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर हफ्ते भर से ज्यादा समय से आंदोलनरत नेशनल हेल्थ मिशन के तहत नियोजित कर्मियों को लेकर सरकार सख्त हो गई है। पूर्व में स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने बताया था कि, एनएचएम कर्मचारियों की कई मांगों पर सहमति दी जा चुकी है जबकि नियमितीकरण का प्रस्ताव केंद्र सरकार की सहमति एक बाद ही पूरा किया जा सकेगा।
इसके बाद सरकार ने हड़ताली एनएचएम कर्मियों के खिलाफ एक और बड़ा कदम उठाया था। विभाग ने हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों को ‘नो वर्क नो पेमेंट’ का नोटिस जारी किया था यानी हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलेगा। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि संविदाकर्मी के काम नहीं करने पर पेमेंट नहीं मिलता है। एनएचएम कर्मचारी कई दिनों से लापता हैं, इसलिए विभाग ने नो वर्क नो पेमेंट का नोटिस जारी किया है।
दूसरी ओर हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ बर्खास्तगी और वेतन रोके जाने जैसे फैसले से एनएचएम संघ भड़क उठा है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमित मिरी ने कहा है कि, सरकार का आदेश कर्मचारियों के लिए दमनकारी है। एनएचएम कर्मचारी 18 अगस्त से हड़ताल पर गए ऐसे में उनके पूरे महीने का वेतन काटे जाने का आदेश क्यों जारी किया गया है? उन्होंने बताया कि, सरकार के आदेश से कर्मचारी भड़क रहे है। उन्होंने इस बात अपर जोर दिया कि, समाधान कार्रवाई से नहीं बल्कि संवाद से निकलेगा।
बता दें कि एनएचएम कर्मचारियों की मांगो को पूरा किए जाने के संबंध में हेल्थ मिनिस्टर जायसवाल ने कहा कि, एनएचएम कर्मियो के लिए 22% वेतन वृद्धि, ट्रांसफर नीति बनाने की सहमति और 30 दिनों के चिकित्सकीय अवकाश जैसी मांगों पर सहमति दी जा चुकी है। जहाँ तक एनएचएम कर्मियों के नियमितीकरण का सवाल है तो यह मांग भारत सरकार की सहमति से पूरी हो पाएगी। इस तरह स्वास्थ्य मंत्री ने रेग्यूलाइजेशन का गेंद केंद्र के पाले में डाल दिया है। प्रदेश की राजधानी रायपुर समेत सभी जिला मुख्यालयों में 18 अगस्त से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारियों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस हड़ताल का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ में NHM के तहत लगभग 16 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं।