उच्च शिक्षा विभाग ने यूनिवर्सिटी को ऑनलाइन परीक्षा लेने का आदेश जारी कर दिया है। इसमें उच्च शिक्षा विभाग ने लिखा है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 11 फरवरी के पत्र में उच्च शिक्षा संस्थानों को क्षेत्रीय परिस्थिति के आधार पर निर्णय लेने अधिकृत किया था। संक्रमण के कारण कक्षाएं देर से शुरू हुईं। परीक्षाओं में कम से कम 50 से 60 दिन लगता है।
इस स्थिति में परीक्षा केंद्रों में थोड़ी सी चूक का गंभीर परिणाम हो सकता है। ऐसे में यूनिवर्सिटी के सुझावाें के आधार पर ऑनलाइन या ब्लैंडेड मोड पर सत्र 2021-22 की परीक्षा होगी। इसके लिए विवि को कार्यपरिषद से निर्णय लेना हाेगा। ऐसे में अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी अब ऑनलाइन परीक्षा की तैयारी करेगी।
यूनिवर्सिटी के कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी के अनुसार जिस तरह संक्रमण कॉल में पुराने वर्षों में परीक्षाएं हुई हैं, उन्हीं पद्धति को अपनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्रों को उत्तरपुस्तिका दी जाएगी, जिससे उन्हें उत्तरपुस्तिका खरीदना ना पड़े।
पेपर रद्दी में पड़े
अटल यूनिवर्सिटी ने सत्र 2019-20 में प्रश्नपत्र छपवाए थे। संक्रमण के कारण ऑनलाइन परीक्षा ली गई। वहीं कुछ छात्रों को पिछले वर्षों के नंबर व आंतरिक परीक्षा के नंबर पर प्रमोट कर दिया गया। इस सत्र का प्रश्नपत्र अभी तक रद्दी में पड़ा हुआ है। वहीं इस बार एयू ने अभी तक प्रश्नपत्र नहीं छपवाए हैं।
एयू को ये करना होगा
अटल यूनिवर्सिटी कॉलेजों में प्रायोगिक परीक्षा ले रही है। ऐसे में जिन कॉलेजों में अभी प्रायोगिक परीक्षाएं नहीं हुई, इस पर निर्णय लेना होगा। समय सारिणी तीसरी बार बदलनी होगी। उत्तरपुस्तिका कॉलेजों में पहुंचाने और कॉलेजों से छात्रों से वितरित करने की तारीख की घोषणा करनी पड़ेगी।
सेंट्रल यूनिवर्सिटी भी ऑनलाइन लेगी परीक्षा
सेंट्रल यूनिवर्सिटी भी छात्रों की ऑनलाइन परीक्षा लेगी। यूनिवर्सिटी में अभी ऑफलाइन कक्षाएं शुरू हो गई हैं। 20 अप्रैल तक परीक्षाएं होनी हैं। पर कुछ विभाग द्वारा सीयू में छात्रों को प्रिप्रेशन लीव ना देकर पढ़ाई कराई जा रही है। वहीं कुछ विभागों ने आंतरिक परीक्षाएं ऑफलाइन ली हैं।
10वीं-12वीं की परीक्षा के बाद अब मूल्यांकन शुरू हो गया है। बिलासपुर में दो मूल्यांकन केंद्र मल्टीपरपज और महारानी लक्ष्मी बाई स्कूल में बनाए गए हैं। पहले दिन 2 घंटे देर से मूल्यांकन शुरू हुआ। केंद्रों में मोबाइल प्रतिबंधित था पर मूल्यांकनकर्ता इस नियम को नहीं माना। वे मोबाइल लेकर अंदर गए। मूल्यांकनकर्ताओं ने बताया कि छात्रों की उत्तरपुस्तिका में राइटिंग समझ नहीं आ रही थी कि उन्होंने क्या लिखा है। एक-दूसरे से पूछना पड़ रहा था, क्योंकि दो साल की ऑनलाइन पढ़ाई में छात्रों के लिखने की प्रैक्टिस छूट गई है।
वहीं मूल्यांकनकर्ताओं ने बताया कि छात्राें ने हिंदी गलत लिखी है। अधिकांश मात्राएं गलत हैं। 10वीं-12वीं के छात्रों की उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन सोमवार को शुरू हुआ। मल्टीपरपज स्कूल केंद्र में 88 हजार और महारानी लक्ष्मी बाई स्कूल में 1 लाख 9 हजार 880 उत्तरपुस्तिकाएं मूल्यांकन के लिए पहुंची हैं।
मल्टीपरपज में मूल्यांकन के लिए 400 और एमएलबी में 650 शिक्षकों की ड्यूटी लगी है। पहले दिन मल्टीपरपज में 182 मूल्यांकनकर्ता ही पहंुचे। वहीं एमएलबी में 140 मूल्यांकनकर्ता पहुंचे थे। पहले इनको प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद मूल्यांकन करने वालों ने प्रश्नपत्र और मॉडल आंसर पढ़े, इसलिए 2 घंटे विलंब से मूल्यांकन करना शुरू हुआ। मूल्यांकनकर्ताओं ने बताया कि कई ऐसी काॅपियां मिलीं, जिसके शब्द समझने में समय लग रहा था कि छात्र क्या लिखना चाह रहा है। मात्राएं गलत थीं, इसलिए नंबर काटना पड़ रहा था। पहले दिन मल्टीपरपज स्कूल में 980 और एमएलबी स्कूल में 650 उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन हो सका।