रायपुर: नगर निगम की सीमा में 17 और गांव जुड़कर अब शहर बनेंगे। शहरी विस्तार की दिशा में यह कदम उठाया जा रहा है। नगर निगम सीमा से लगे काठाडीह, कांदुल, दतरेंगा, डोमा, बोरियाकला, सेजबहार, मुजगहन, टेमरी धरमपुरा, सेरीखेड़ी, तुलसी बराडेरा, पिरदा, सकरी, धनसूली, नरदहा, सेमरिया, बरौदा और परसुलीडीह सहित 17 गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। गांवों के निगम क्षेत्र में आने से यहां नगर निगम की सभी सुविधाएं नागरिकों को उपलब्ध होंगी।
इन गावों में सड़क, पेयजल, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक परिवहन और स्वच्छता व्यवस्था का विस्तार होगा। निगम सीमा में आने से ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी सुविधाओं का लाभ मिलेगा और अव्यवस्थित फैलाव के बजाय योजनाबद्ध विकास को बढ़ावा मिलेगा। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि इस विस्तार से रायपुर के भविष्य का विकास अधिक संतुलित और व्यवस्थित हो सकेगा।
निगम सीमा से लगे गावों का नगर निगम से जुड़ने पर लोगों को अनेक सुविधाएं मिलेंगी। अब तक गांव के अधिकांश लोग अपने घर का कचरा बाहर फेंक देते हैं। जब ये गांव निगम में जुड़ जाएंगे तो लोगों के घरों तक हर सुबह कचरा गाड़ियां पहुंचने लगेंगी। गांवों में पक्की और चौड़ी सड़कों का निर्माण किया जाएगा।
नियमित और सुरक्षित पेयजल आपूर्ति, सीवरेज नेटवर्क और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था होगी। कचरा निपटान की निगम स्तरीय व्यवस्था लागू होगी। साथ ही स्वास्थ्य, उद्यान, सामुदायिक भवन और अन्य नागरिक सुविधाएं भी चरणबद्ध तरीके से विकसित की जाएंगी।
निगम के अधिकारियों ने कहा कि गांवों के निगम क्षेत्र में जुड़ने से भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार की जाएंगी। नए क्षेत्रों में मास्टर प्लान के अनुसार आवासीय, व्यावसायिक और सार्वजनिक उपयोग की जमीन तय की जाएगी। ट्रैफिक, जल निकासी और पर्यावरण संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि आने वाले वर्षों में अनियंत्रित शहरीकरण की समस्याओं से बचा जा सके।
निगम सीमा में आने से ग्रामीणों को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, भवन अनुमति, कर भुगतान और अन्य नागरिक सेवाएं सीधे नगर निगम से मिल सकेंगी। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से जमीन और मकानों की कीमतों में बढ़ोतरी होगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर बनेंगे। साफ-सफाई और रोशनी की बेहतर व्यवस्था से जीवन स्तर सुधरेगा और शहर से गांवों का संपर्क मजबूत होगा।






